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Previous Year Question Paper

QP CSM 2024 Mait Comp 03102024

Pages8
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Civil Services (Main) Examination, 2024 |LPHKM-C-MTLI मैथिली / MAITHILI ( अनिवार्य ) / ( Compulsory ) निर्धारित समय : तीन घंटे अधिकतम अंक : 800 Time Allowed : Three Hours Maximum Marks : 300 प्रश्नपत्र विषयक विशेष निर्देश प्रश्नक उत्तर लिखबार्स पूर्व देल गोल निर्देशकेँ ध्यानपूर्वक पढ़: सभ प्रश्‍न अनिवार्य अछि | प्रत्येक ‏ہہ ہہ‎ अक ओकरा सामने अंकित अछि | उत्तर मैथिली (देवनागरी लिपि) ये लिखू, जाधार कि ग्रमे कोनो दोसर निर्देश नहि हो / 7೫೫2 शब्दक संख्याक ध्यान राखू, अधिक না ૪૪ शब्दये उत्तर लिखला पर अक काटल जा सकैत अछि | प्रस्न-सह-उत्तर पुस्तिकाये रिक्त छोडल स्थानके स्पष्ट रूपसं अवस्य काटि दी / Question Paper Specific Instructions Please read each of the following instructions carefully before attempting questions: All questions are to be attempted. The number of marks carried by a question/part is indicated against it. Answers must be written in MAITHILI (Devanagari script) unless otherwise directed in the question. Word limit in questions, wherever specified, should be adhered to and if answered in much longer or shorter than the prescribed length, marks may be deducted. Any page or portion of the page left blank in the Question-cum-Answer Booklet must be clearly struck off. PHKM-C-MTLI 1 ౧1. Q2. निम्नलिखितमे सँ कोनो एक शीर्षक पर 600 शब्दमे निबन्ध लिख्‌ : (a) लोकतंत्र आ अभिव्यक्तिक स्वतंत्रता (b) की भारतमे पेयजल संकट सम्भाव्य अछि ? ( जनजातीय संस्कृतिक संरक्षण : प्रयास आ सम्भावना (d) अधजल गगरी छलकत जाय निम्नलिखित गद्यांशकें ध्यानपूर्वक पढि ओकर आधार पर नीचाँ देल गेल प्रश्नक उत्तर स्पष्ट, सही 100 आ संक्षिप्त भाषामे लिख्‌ : 12x5=60 आलोचना साहित्यक एक अंग मानल जाइत अछि, तँ ओ साहित्य कॅ अपन सीमाक भीतर रखबाक व्यवस्था જોત अछि | साहित्यमे जखन कोनो एहन वस्तु सम्मलित भड जाइत अछि, तखन ओकर रस प्रवाहमे बाधक होइत अछि | तखने साहित्यमे दोषक प्रवेश भड जाइत अछि | ओहिना जेना संगीतमे कोनो बेसुर ध्वनि ओकरा दुषित कड दैत છે | સત્ય भावक प्रकाश आनन्दित જોત अछि | असत्य भावमे तँ दुखक अनुभव होइत अछि | भड सकैत अछि जे कोनो व्यक्ति कॅ असत्य মানস सेहो आनन्दक अनुभव होइत ଆମ | हिंसा कड कड वा केकरहु धनक अपहरण कड कड વા अपन ங்க लेल க்கட अहित कड कड જિ व्यक्ति कॅ आनन्द प्राप्त होइत છેજ | मुदा, ई मनक स्वाभाविक વૃત્તિ नहि अछि | चोर જે प्रकाश सँ अन्हार बेसी प्रिय છે | एहि सँ प्रकाशक श्रेष्ठतामे कोनो बाधा नहि पड़ैछ | जाहि भाव द्वारा हम अपनाकेँ दोसरमे मिला सकैत छी, વૈદ सत्यभाव अछि | प्रेम हमरा अन्य वस्तुसँ मिलबैत अछि, अहंकार पृथक करैत अछि | जाहिमे अहंकारक मात्रा बेसी रहैत अछि ओ दोसरसँ कोना भेट करौक ? तँ प्रेम सत्यभाव अछि, अहंकार असत्यभाव अछि | PHKM-C-MTLI 2 भक्ति करबाक लेल જોતો प्रत्यक्ष वस्तुक आवश्यकता होइत अछि | दया करबाक लेल कोनो पात्रक आवश्यकता होइछ | धैर्य आ साहसक लेल सेहो मदतिक जरूरत होइछ | तात्पर्य ई अछि जे हमर भावके जगेबाक लेल कोनो बाहरी वस्तुसँ सामां जस्य होयबाक चाही | অঁ बाह्य प्रकृतिक हमरा उपर कोनो असरि नहि पड़य, तँ हम கடு पत्रशोकमे विलाप करैत देखि ‏ےھ‎ चारि बूंद नहि खसा सकैत છી | जं हम कोनो आनन्दोत्सवमे सहभागी बनि आनन्दित नहि भड सकैत छी, तं ई ஏக चाही ગે हम निर्वाण प्राप्त कड लेने छी | ओहि दिशाक लेल साहित्यक જોતો मूल्य नहि | साहित्यकार तं વૈદ सुच्या भड सकैत अछि जे दुनियाँक सुख-दुख सँ सुखी आ दुखी भड सकय आ दोसरमे सुख आ दुख उत्पन्न कड सकय | स्वयं दुख अनुभव कड लेब wate नहि अछि | कलाकारमे ओकर प्रकट करबाक सामर्थ्यं होयबाक चाही | मुदा परिस्थिति எனக்‌ भिन्न दिशामे लड जाइत अछि | मनुष्यमात्रमे भावक समानता होइतो, परिस्थितिमे भेदक कारणे प्रतिक्रियामे भेद पर असरि होइत अछि | जँ हम कृषकक संग रहैत છી, વા हमरा हुनका संग रहबाक अवसर भेटैत अछि, तं स्वभावतः हम ‏جج‎ सुख-दुख ‏٭‎ अपन सुख-दुख बूझड लगैत छी, आ हुनका सँ ओही मात्रामे प्रभावित होइत छी, जतेक हमर भावमे उतत छथि | एहि तरह अन्य परिस्थिति க सेहो बुझबाक चाही | অঁ एकर अर्थ ई लगाओल जाय कि अमुक प्राणी कृषकक वा श्रमिकक वा कोनो आन्दोलनक प्रचार करैत अछि, तँ ई अन्याय अछि | साहित्य आ प्रचारमे की अन्तर अछि ? प्रचारे অঁ आत्मविज्ञापन नदियों हो तँ एक विशेष उद्देश्य कॅ पूरा करबाक ओ उत्सुकता होइत अछि, जे साधनक परवाह नहि करैत अछि | साहित्य शीतल, मन्द समीर अछि, जे सभकेँ शीतल आ आनन्दित करैत अछि । प्रचार बिहाड़ अछि, जे हरियर ୩୪ જે ளக फेकैत अछि आ झोपड़ी वा महल दुनू कॅ हिला दैत अछि | ओ रस-विहीन होयबाक கனி आनन्दक वस्तु नहि अछि, मुदा অঁ कियो चतुर कलाकार আনিম सौन्दर्य आ रस भरि दैक, તે ओ प्रचारक वस्तु नहि ಇತ कड सतूसाहित्यक वस्तु મડ जाइत अछि | (a) आलोचना साहित्यक अंग किएक अछि ? 00) सत्य आ असत्य भावसं की आशय अछि ? (८) मनक स्वाभाविक वृत्ति की नहि अछि ? (ત) लेखकक दृष्टिमे साहित्यकार के भड सकैत अछि ? (€) साहित्य आ प्रचारे की अन्तर अछि ? PHKM-C-MTLI 3 12 12 12 12 12 Q3. निम्नलिखित अनुच्छेदक सारांश लगभग एक-तिहाइ शब्दमे लिखू | एकर शीर्षक लिखबाक आवश्यकता नहि अछि । सारांश अपनहि शब्दमे लिख्‌ । ई बात ध्यान देबाक अछि जे इर्ष्या व्यक्ति-विशेष सँ होइत अछि | ई नहि होइत अछि जे केकरहु ऐश्वर्य, गुण वा মান सँ सम्पन्न देखलहूँ, तँ ओकरहि सं इर्ष्या भड गेल | इर्ष्या ओकरहि सँ होइत अछि जकर विषयमे ई धारणा होइत अछि ગે लोकक दृष्टि हमरा संग-संग ओहू पर अवश्य पड़त वा पड़ैत होयत | अपना सँ दूर होयबाक જાએ अपना संग-संग जाहि पर लोकक ध्यान जयबाक निश्चय नहि होइत अछि ओकर प्रति इर्ष्या उत्पन्न नहि होइत अछि | काशीमे கக वला कोनो धनीक જે यूरोपक कोनो धनीकक बात सुनि कड gat नहि हेतैक | हिन्दीक कोनो कवि केँ अंगरेजीक कोनो कविक महत्त्व सुनि कड इर्ष्या नहि हेतैक | सम्बन्धी, बालसखा, सहपाठी आ पड़ोसीक बीच इर्ष्याक विकास बेसी देखल जाइत अछि | बालपन सँ जे आदमी एक संग उठैत-बैसैत देखल गेल अछि, ओहीमे सँ कियो एक-दोसरक उत्थान सँ ગત देखल जाइत अछि | অঁ दू संगीमे सँ कोनो एक नीक पद पर पहुँचि जाइत अछि तँ ओ एहि उद्योगमे रहैत अछि जे दोसर कोनो बढ़ियाँ पद पर नहि पहुँचि जाय | प्राय: अपन उन्नतिक गुप्त बाधाकेँ પતા लगबैत-लगबैत लोक अपन कोनो पैघ पुरान मित्र ঘৰি पहुँचि जाइत अछि | ୩୮ समय संसर्ग-सूत्रमे बंधिकड हम-दोसर कॅ अपना संग एक पाँतीमे org જોત छी, ओहि समय सहानुभूति, सहायता आदिक सम्भावना प्रतिष्ठित होयबाक संग-संग इर्ष्या आ द्वेषक सम्भावनाक न्यो पड़ जाइत अछि ۱ अपने જોતો युक्ति सँ अपन उपकार आ उपकारक सम्भावनाक सूत्रपात करी आ एहि प्रकारे भविष्यकेँ अनिश्चयक बाधामे 2 ई कखनो भए नहि सकैछ | भविष्यक अनिश्चयात्मकता अटल आ अजेय अछि | अपन लाख विद्या-बुद्धि सँ सेहो हम ओकरा एकदम सँ हटा नहि सकैत छी । आब ध्यान tare নান ई अछि जे इर्ष्याक संसारक लेल ಕಾಗೆ करड वला आ ஊக ஈக अतिरिक्त स्थिति पर ध्यान னக वला समाजक सेहो आवश्यकता )< ۱ एहि समाजक धारणा पर प्रभाव देबाक लेल ಕಾಗೆ कयल जाइत अछि । ऐश्वर्य, गुण वा मानक गुप्त रूपसँ बिना कोनो समुदाय के ज्ञात HUG, सुख आ सन्तोष भोगबाक लेल नहि | ऐश्वर्य वा गुणमे हम भनहि कोनो व्यक्ति सँ वस्तुत: बढि कड वा PHKM-C-MTLI 4 60 Q4. ओकर तुल्य नहियो होइ તરયો ‏٭‎ समाजक ई धारणा अछि कि हम ओहिसँ बढि कड वा ओकर तुल्य ਭੀ તં हम संतुष्ट रहब । इष्याक घोर कष्ट नहि ୪୭୩୭ पड़त | केहन अनसोंहात बात अछि जे वस्तु प्रेरित सँ वंचित रहियो कड हम समाजक धारणा मात्रसँ संतुष्ट रहैत छी । ಕಾಗೆ सामाजिक जीवनक कृत्रिमतासँ उत्पन्न एक विष अछि | एकर प्रभाव सँ हम दोसरक उन्नति सँ अपन कोनो वास्तविक हानि नहियों देखिकड व्यर्थमे दुखी होइत छी न्यायाधीश न्याय करैत अछि, कारीगर पजेबा ગોરેત अछि | समाज-कल्याणक विचार सँ न्यायाधीशक साधारण व्यवहारमे कारीगरक प्रति ई प्रकट करायब उचित नहि कि अहाँ हमरा सँ छोट છી ? जाहि समूहमे छोट-पैघक अभिमान ठाम-ठाम दृढ़ भड जाइत छैक, ओकर भिन्न-भिन्न वर्गक बीच स्थायी इर्ष्या स्थापित भड जाइत अछि; आ संघ शक्तिक विकास बहुत कम अवसर पर दृष्टिगत होइछ | ਗੱ समाजमे काजकड भिन्न-भिन्न प्राणी जीवन निर्वाह જોત अछि, परस्पर छोट-पैघक ढोलहो नहि पीटल जाय, अपितु ओकर विभिन्नता க स्वीकारल जाय, एहिसँ बहुत रास असंतोष समाप्त भड जायत | जतड धरि छोट-पैघक भाव अछि, बहुत प्रचारित भड जाइत अछि आ जीवन-व्यवहारमे निर्दिष्ट आ स्पष्ट रूपमे देखल जाइत अछि | ओतड लोकक शक्ति मात्र किछु विशेष-विशेष स्थानक दिस प्रवृत्त भड ओहि-ओहि स्थान पर एकत्रित हुअ लगैत अछि आ समाजक कार्यक्षेत्रमे विषमता আনি जाइत अछि | (519 ௭௭) निम्नलिखित વાજે अंगरेजीमे अनुवाद करू : कुटीर उद्योग आ लघु उद्योगक चर्चा आइ भारतमे एक बेर पुन: जोर पकड़ि रहल अछि | एहि प्रकारक उद्योग-धंधाक मूलमे एहन ઘોચા लूरिक छोट-छोट काज-धंधाक परिकल्पना नुकायल अछि, ۴ छोट स्थान पर कम पूंजी आ श्रमसँ स्थापित कड कियो व्यक्ति उत्पादनक भागीदार बनि अपन रोजी रोटीक समस्या हल कड सकैत अछि, बेकारी सँ लडि कड सामान्य स्तर पर अपन जीवन जी सकैत अछि | भारत एहन देशक लेल एहि प्रकारक છોટ उद्योग-धंधा बेसी हितकर भड सकैत अछि, ई बात महात्मा गाँधी स्वतंत्रता-संग्रामक दिनमे afer गेल छलाह | ओ स्वतंत्र भारतमे ओही प्रकारक इकाइ स्थापित करबाक જ PHKM-C-MTLI 5 20 Q5. परंपरागत उद्योगक नवीनीकरण करबाक प्रेरणा देने छलाह | किंतु, स्वतंत्रता-प्राप्तिक बाद, नेतृत्व एहि दिस ध्यान नहि देलक | पैघ-पैघ उद्योग धंधा एहिठाम विकसित भेल आ ओ सेहो समर्थ लोकक निजी संपत्ति ননি कड रहि गेल । इम्हर बढ़ैत जनसंख्या, शिक्षाक प्रचार, जागृति, अधिकारक माँग आ पहिचान बेरोजगारक निरंतर पैघ होइत पाँति - ই सभ आजुक जागरूक चिंतक केँ विवश कड देने अछि, देरिए सँ सही, देशक एहि प्रकारक बढ़ैत समस्या सँ मुक्तिक लेल गाँधीवादी सूत्रकेँ अपनाबी - जे कि एहिठामक आवश्यकता पूरा कड सकैत अछि | परिणामस्वरूप আৰু देशमे कुटीर-उद्योग जाल जकाँ पसरड लागल अछि | निम्नलिखित ಗತ್‌ मैथिलीमे अनुवाद करू: In our democratic system, the press has a vital role. While there has been large-scale expansion of the print and visual media in recent years, a focused approach to dealing with major societal and political issues has still to evolve. There is, as yet, excessive and exaggerated coverage of exposures and scandals and far too little well-informed comment or analysis of the various deep-rooted factors which generate the continuing malaise. The media could make an extremely useful contribution by devoting adequate coverage to tasks well done, highlighting the achievements of honest and efficient public servants and organizations, according special attention to developments in the remote and backward areas of our country. Our media is free and unfettered. It should be able to expose cases and incidents involving irregular and unlawful exercise of authority and abuses of all kinds. The existing ills in our socio-political environment will, on present reckoning, take considerable time to remedy. The Department of Personnel and Administrative Reforms should focus on establishing institutions responsible for all personnel matters — appointments, postings, transfers etc. — without any external interference. Also, there is a need for adoption of a robust code of ethics to be followed by those involved in public functioning. PHKM-C-MTLI 6 20 Q6. (a) (b) ০) (6) निम्नलिखित शब्दक पर्यायवाची शब्द लिखू : @ भानु (11) आलय 01) আমি (iv) जल (૪) राति निम्नलिखित शब्दक विपरीतार्थक शब्द लिख्‌ : 0) घृणा (11) अग्रज (1) शान्ति (iv) गति (૪) कठोर निम्नलिखित अनेकक शब्दक एक शब्द लिख्‌ : 0) माथसंपैरधरि ઊં) जकर गरदनि सुन्दर हो 07) कम खर्च करड वला (iv) अपन हित चाहड वला യ कोनो વાત જે बुझबाक इच्छा निम्नलिखित शब्दके वाक्य मे प्रयोग करू, जाहि सं अर्थ स्पष्ट भड जाय: 0) 8۳۲ ‏رم‎ चिक्कस (1) ककबा (iv) झिटुका (૪) बाकुट PHKM-C-MTLI 7
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