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Civil Services (Main)
Examination, 2026 KVMS-C-HND
हिन्दी / HINDI
( अनिवार्य ) / (Compulsory )
निर्धारित समय : तीन घंटे अधिकतम अंक : 300
Time Allowed : Three Hours Maximum Marks : 300
प्रश्न-पत्र के लिए विशिष्ट अनुदेश
कृपया प्रश्नों के उत्तर देने से पूर्व निम्नलिखित प्रत्येक अनुदेश को ध्यानपूर्वक पढ़ें :
सभी प्रश्नों के उत्तर लिखना अनिवार्य है |
प्रत्येक प्रश्न के अंक उसके सामने अंकित ଛି /
उत्तर हिन्दी में ही लिखे जाने चाहिए, यदि किसी प्रश्न-विशेष में अन्यथा निर्दिष्ट न हो /
जिन प्रश्नों के संबंध में अधिकतम शब्द-संख्या निर्धारित है, वहाँ इसका अनुपालन किया जाना चाहिए । यदि किसी प्रश्न का उत्तर, निर्धारित
शब्द-संख्या की तुलना में काफी लंबा या छोटा है तो अंकों की कटौती की जा सकती है |
प्रश्न-सह-उत्तर (क्यू सी.ए.) पुस्तिका का कोई भी पृष्ठ अथवा पृष्ठ का भाग, जो खाली छोड़ा गया हो, उसे स्पष्ट रूप से काट दिया जाना चाहिए |
Question Paper Specific Instructions
Please read each of the following instructions carefully before attempting questions :
All questions are to be attempted.
The number of marks carried by a question is indicated against it.
Answers must be written in HINDI unless otherwise directed in the question.
Word limit in questions, wherever specified, should be adhered to and if answered in much longer
or shorter than the prescribed length, marks may be deducted.
Any page or portion of the page left blank in the Question-cum-Answer (QCA) Booklet must be
clearly struck off.
KVMS-C-HND 1
Ql.
Q2.
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर 600 शब्दों में निबन्ध लिखिए : 100
(੩) भारतबोध की अवधारणा और हमारा भविष्य
(0) डिजिटल युग में नागरिकों के कर्तव्य
(૦ भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान और मंगलयान
(৫) स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उसके आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट,
सही और संक्षिप्त भाषा में दीजिए : 12x5=60
दुःख के વર્ષ में जो स्थान भय का है, वही स्थान आनन्द-वर्ग में उत्साह का है | जिन कर्मों में किसी
प्रकार का कष्ट या हानि सहने का साहस अपेक्षित होता है उन सब के प्रति उत्कण्ठापूर्ण आनन्द उत्साह के
अन्तर्गत लिया जाता కే | कष्ट या हानि के भेद के अनुसार, उत्साह के भी भेद हो जाते हैं । साहित्य-मीमांसकों
ने इसी दृष्टि से युद्धवीर, दानवीर, दयावीर, इत्यादि भेद किए हैं | इनमें सबसे प्राचीन और प्रधान युद्ध वीरता है,
जिसमें आघात, पीड़ा নয়া મૃત્યુ तक की परवाह नहीं रहती । इस प्रकार की वीरता का प्रयोजन अत्यन्त प्राचीन
काल से पड़ता चला आ रहा है, जिसमें साहस और प्रयत्न दोनों चरम उत्कर्ष पर पहुँचते हैं । पर केवल कष्ट
या पीड़ा सहन करने के साहस में ही उत्साह का स्वरूप स्फुरित नहीं होता | उसके साथ आनन्दपूर्ण प्रयत्न या
उसकी उत्कण्ठा का योग चाहिए | बिना बेहोश हुए भारी फोड़ा चिराने જો तैयार होना साहस कहा जाएगा, पर
उत्साह नहीं । इसी प्रकार चुपचाप, बिना हाथ-पैर हिलाए, घोर प्रहार सहने के लिए तैयार रहना साहस और
कठिन-से-कठिन प्रहार सहकर भी जगह से न हटना धीरता कही जाएगी । ऐसे साहस और धीरता को उत्साह के
अन्तर्गत तभी ले सकते हैं जबकि साहसी या धीर उस काम को आनन्द के साथ करता चला जाएगा जिसके
कारण उसे इतने प्रहार सहने पड़ते हैं । सारांश यह है कि आनन्दपूर्ण प्रयत्न या उसकी उत्कण्ठा में ही उत्साह का
दर्शन होता है, केवल कष्ट सहने के निश्चेष्ट साहस में नहीं | धृति और साहस दोनों का उत्साह के बीच संचरण
होता है।
दानवीर के अर्थ-त्याग का साहस अर्थात् उसके कारण होने वाले कष्ट या कठिनता को सहने की
क्षमता अन्तर्हित रहती है । दानवीरता तभी कही जाएगी जब दान के कारण दानी को अपने जीवन-निर्वाह में
किसी प्रकार का कष्ट या कठिनता दिखाई देगी । इसी कष्ट या कठिनता की मात्रा या सम्भावना जितनी ही
अधिक होगी, दानवीरता उतनी ही ऊँची समझी जाएगी | पर इस अर्थ-त्याग के साहस के साथ ही অন तक પૂર્ણ
तत्परता और आनन्द के चिह्न न दिखाई पड़ेंगे तब तक उत्साह का स्वरूप न खड़ा होगा |
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Q3.
युद्ध के अतिरिक्त संसार में और भी ऐसे विकट काम होते हैं, जिनमें घोर शारीरिक कष्ट सहना पड़ता है
और प्राण-हानि तक की संभावना रहती है । अनुसंधान के लिए तुषार-मण्डित अभ्रभेदी अगम्य પર્વતો की
चढ़ाई, ध्रुव देश या सहारा के रेगिस्तान का सफर; क्रूर, बर्बर जातियों के बीच अज्ञात घोर जंगलों में प्रवेश,
इत्यादि भी पूरी वीरता और पराक्रम के कर्म हैं | इनमें जिस आनन्दपूर्ण तत्परता के साथ लोग प्रवृत्त हुए हैं वह
भी उत्साह ही है।
(8) उत्साह में साहस की भूमिका को स्पष्ट कीजिए |
(8) धीरता का अभिप्राय क्या है?
(০) उत्साह का सही दर्शन कैसे होता है?
(0) आनन्दपूर्ण तत्परता और उत्साह के अंतर्सबंध को रेखांकित कीजिए |
(6) दानी को दान के कारण নয়া सहन करना पड़ता है ?
निम्नलिखित अनुच्छेद का सारांश लगभग एक-तिहाई शब्दों में लिखिए । इसका शीर्षक लिखने की
आवश्यकता नहीं है சாண் अपने शब्दों में ही लिखिए |
अच्छा શ્રોતા होना सबसे महत्त्वपूर्ण और आकर्षक जीवन कौशलों में से एक है | फिर भी, हम लोगों में
से बहुत कम लोग सुनना जानते हैं, इसका कारण यह नहीं है कि हम बुरे हैं, अपितु किसी ने हमें यह सिखाया ही
नहीं | इससे सम्बन्धित तथ्य यह भी है कि बहुत कम लोगों ন हमें ध्यानपूर्वक सुना है | परिणामस्वरूप हम
सामाजिक जीवन में सुनने की अपेक्षा बोलने के मोह में ਧੋਖੇ रहते हैं, दूसरों से मिलने की व्यग्रता रहती है, परन्तु
उन्हें सुनने की नहीं । धीरे-धीरे मित्रता सामाजिक स्वार्थ में परिवर्तित होने लगती है । एक अच्छा श्रोता कई ऐसे
कार्य करता है, जो उसके साथ समय बिताने को सुखद बना देते हैं । बहुधा हम किसी ऐसी बात के साथ
बातचीत प्रारंभ करते हैं, जो महत्त्वपूर्ण तो लगती है, किन्तु स्पष्ट नहीं होती | कभी हम अपने काम જો लेकर
तनाव में होते हैं, कभी अपने कार्यक्षेत्र में महत्त्वाकांक्षी बनने के बारे में सोचते रहते ই, हम सुनिश्चित नहीं कर
पाते कि हमारे लिए क्या उचित है; कभी हमें यह संदेह होता है कि कोई सम्बन्ध कठिन दौर से गुजर रहा है, हम
किसी बात को लेकर चिंतित रहते हैं अथवा जीवन में निराशा का अनुभव कर रहे हैं (हालाँकि हमें ठीक-ठीक
पता नहीं होता कि समस्या क्या है) या शायद हम किसी हेतु से अत्यधिक उत्साहित रूप से और ऊर्जा से भरे
होते हैं, पर अपने इस उत्साह के कारणों को स्पष्ट रूप से समझ नहीं पाते ।
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वस्तुतः ये सभी विषय स्पष्टता की माँग करते हैं । एक अच्छा श्रोता यह समझता है कि आदर्श रूप से
दूसरे से बातचीत हमें एक उलझे और उत्तेजित मन से निकालकर एक अधिक केन्द्रित और शांत मन की
अवस्था तक पहुँचा सकती है । संवाद के माध्यम से हम मिलकर यह समझने का प्रयास कर सकते हैं कि
वस्तुत: दाँव पर क्या लगा था, लेकिन बहुधा ऐसा नहीं हो पाता है | इसलिए कि बातचीत में स्पष्टता की इच्छा
और आवश्यकता के प्रति जागरूकता नहीं होती । अच्छे श्रोताओं की कमी होती है । परिणामस्वरूप लोग
विश्लेषण करने के बजाय अपनी-अपनी बातों पर અરે रहते हैं । वे अपनी चिंता, उत्साह, उदासी या आशा को
बार-बार अलग-अलग रूपों मे दोहराते हैं | सामने वाला सुनता है, किन्तु उन्हें गहराई से समझने में मदद नहीं
करता | अच्छा શ્રોતા बातचीत की सूक्ष्म युक्तियो का सहारा लेकर स्थिति को बदलता है |
जब दूसरा व्यक्ति बोलता है, तब वह उसके साथ पूरी तरह जुड़ जाता है | वह छोटे-छोटे प्रोत्साहन देता
है जैसे सहानुभूति भरी आह, उत्साहवर्धक संकेत या रुचिपूर्ण रणनीतिक जिज्ञासा, इस तरह वह सामने वाले को
अपने विचारों और भावनाओं की गहराई में জান के लिए प्रेरित करता છે | वह कहना पसंद करता है - “मुझे
इसके बारे में और बताओ ...”, “जब तुमने ऐसा कहा, तब मैं मंत्रमुग्ध हो गया,” “तुम्हें क्या लगता है, ऐसा ୩୩
हुआ ?”, या “तुम्हें उस समय कैसा महसूस हुआ ?” एक अच्छा श्रोता यह मानकर चलता है कि दूसरों से
बातचीत में अस्पष्टता स्वाभाविक | वह न तो आलोचना करता ই और न ही अधीर होता है | वह समझता है
कि अस्पष्टता एक सार्वभौमिक और महत्त्वपूर्ण मन की उलझन है, जिसे सुलझाने का दायित्व एक सच्चे मित्र
का है | बहुधा हम किसी अनुभव के आसपास भटकते रहते हैं, पर उसके मूल कारण तक नहीं पहुँच पाते | ऐसे
में एक अच्छा શ્રોતા हमें विस्तार से बोलने और गहराई में जाने और अग्रसर होने के लिए प्रेरित करता है । हमें
ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता होती है जो सलाह देने के बजाय केवल दो सरल किन्तु जादुई शब्द कहे - “बढ़े
எள் | हम भाई-बहनों का उल्लेख करते हैं और वे अतिरिक्त जिज्ञासा रखते हैं; यथा उनका बचपन में सम्बन्ध
कैसा था ? समय के साथ उसमें क्या बदलाव आए, वे यह समझने का प्रयास करते हैं कि हमारी चिंताओं और
उत्साह का मूल कहाँ है ? वे पूछते हैं - “वह बात आपको इतनी परेशान क्यों कर रही थी?” या “वह बात
आपके लिए इतनी महत्त्वपूर्ण क्यों थी?” साथ ही, वे हमारी पिछली बातों को भी याद रखते हैं | कभी-कभी વે
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৫4.
हमारी कही हुई किसी पुरानी बात का संदर्भ देते हैं और हमें महसूस होता है कि वे वास्तव में हमारे साथ गहराई
से जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं | अस्पष्ट बातें करना घातक रूप से आसान होता है | हम बहुधा इतना कहते हैं
कि कोई वस्तु सुंदर है, या भयानक, सुखद है या परेशान करने वाली, लेकिन हम यह समझने का प्रयास नहीं
करते कि हमें ऐसा क्यों अनुभव होता है | एक अच्छा શ્રોતા हमारी इन सतही बातों पर रचनात्मक एवं मैत्रीपूर्ण
संशय करता है और इन गहरी भावनाओं को समझने का प्रयास करता है, जो हमारे भीतर छिपी होती है।
(748 शब्द)
निम्नलिखित गद्यांश का अंग्रेज़ी में अनुवाद कीजिए :
भारतीय नाविक जहाज चलाने के अपने कौशल के लिए प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध रहे हैं । अब से
5000 वर्ष पूर्व उन्होंने समुद्र में नौका चलाने की शुरुआत की थी | उस समय समुद्री यात्रा में काम आने वाले
कुछ गिने-चुने यंत्र होते थे । आज की तरह के परिष्कृत उपकरण तब उपलब्ध नहीं थे । मगर प्राचीन नाविकों की
ज्ञानेन्द्रियाँ शायद ज्यादा तेज होती थीं । उन्हें मौसम के मिजाज की समझ भी अच्छी थी | वे ग्रह नक्षत्रों की जाँच
कर सकते थे, हवाओं की समझ रखते थे और समुद्र જે पानी के रंग से गहराई बता सकते थे । समुद्री
जीव-जंतुओं को देखकर वे जमीन से दूरी और कई बार तो देश तक का पता लगा लेते થે | उस जमाने में कोई
समुद्री अकादमियाँ नहीं થી | इसलिए जो भी प्रशिक्षण उन्हें मिलता था, वह अनुभव की पाठशाला में परीक्षण
और ग़लतियों से सीखने पर आधारित होता था | कभी-कभी दुर्घटनाएँ भी हो जाती थीं, लेकिन उनका साहस
और आत्मविश्वास उन्हें समुद्री यात्राओ की प्रेरणा देता था | इसी के बल पर वे पश्चिम में फारस की खाड़ी,
अफ्रीका के पूर्वी तट और पूर्व तथा सुदूर पूर्व इंडोनेशिया, कम्बोडिया, अन्नाम, बोर्नियो તથા सेलीबीज जैसे
दूर-दराज़ द्वीपों तक पहुँचने में कामयाब हुए । समुद्री प्रशिक्षण का आधुनिक दौर 1920 के दशक के प्रारंभिक
वर्षों में शुरू हुआ |
आज़ादी के बाद भारत में परिवर्तन की सुखद बयार बह रही है । भारत જી गौरवशाली जहाजरानी
परंपरा का जो सूर्य कुछ शताब्दियों पहले अस्त हो गया था वह एक बार फिर उदय होकर चमकने लगा है ।
भारतीय जहाजरानी आज सही दिशा में अग्रसर है |
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95. निम्नलिखित गद्यांश का हिन्दी में अनुवाद कीजिए : 20
Orientation for entrepreneurship has to start right from the schools. In
schools, teachers need to highlight the role of entrepreneurship in national
development. During college, students must be exposed to business
development opportunities and must be trained towards the creation of new
enterprises. Parents should encourage their children to take up new ventures
after their education. We should cultivate a mindset that ‘Idea is wealth’.
The government must create a facilitating environment for the
provision of venture capital for innovative ideas without collateral security.
Universities and engineering and management institutions should work with
banks and other funding agencies towards simplifying procedures for setting
up businesses and working with entrepreneurs till the project becomes
self-sustaining and viable. Procedures in government should facilitate the
spotting and recognition of new Indian talent in entrepreneurship by creating
a level playing field for healthy competition. Citizens who can afford it should
turn themselves into angel investors or start venture capital organizations to
fund such new ventures. Big and small industries need to have an open mind
in order to encourage and partner with young entrepreneurs.
(అ निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए : 2x5=10 ہو
उड़ती चिड़िया पहचानना | )0
आँखें फेर लेना )7(
(ఘు नाम વડે और दर्शन छोटे 2
(ં૪) પેટ में चूहे कूदना 2
(ए) बिना चावल के खीर पकाना 2
(७) निम्नलिखित वाक्यो के शुद्ध रूप लिखिए : 2x5=10
0) साहित्य और सौंदर्यशास्त्र का घोर सम्बन्ध होता है | 2
ઊં) सिपाहियों જી चहल-पहल फैलती चली जा रही थी ।
(11) ज्ञान के गर्व का भरा व्यक्ति किसी को कुछ नहीं समझता | 2
യ मैं तुम को मिलकर बहुत खुश हुआ | 2
യ अच्छे व्यक्तियों से अच्छा फैलती है । 2
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(2) निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची लिखिए :
0) निशाकर
Gi) वारि
(111) सहचर
(iv) अम्बर
(v) आलय
2x5=10
(ત) निम्नलिखित युग्मो को इस तरह से वाक्य में प्रयुक्त कीजिए कि उनका अर्थ एवं अंतर स्पष्ट हो
जाए:
6) तरणि - तरणी
Gi) कृति - कृती
(1) अगम - आगम
യ सूत - सुत
(४) अंस - अंश
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