Full Text Transcript
Text below was recognized via OCR from scanned pages and may contain minor errors.
Civil Services (Main)
Examination, 2026
KVMS-D-MTLI
मैथिली
प्रश्नपत्र
( साहित्य )
निर्धारित समय : तीन घण्टे अधिकतम अंक : 250
प्रश्न -पत्र स्पष्ट निर्देश
(प्रश्नक उत्तर लिखनासं पूर्व कृपया निम्नलिखित निर्देशकै सावधानीपूर्वक पढि लिअ)
एतय दू खण्ड (Section) विभक्त कुल आठ प्रश्न अछि।
अभ्यर्थी कुल पाँच க उत्तर देथि।
प्रश्न संख्या 1 તથા प्रश्न संख्या 5 अनिवार्य अछि। शेष प्रश्नमेसंँ कोनो तीन प्रश्नक उत्तर लिखू, जाहिमे प्रत्येक खण्ड (8८८४०7 )सँ
कमसँ कम एक க चयन आवश्यक अछि।
प्रश्न/ खण्डक निर्धारित अंक ओकरा समक्ष निर्दिष्ट कयल गेल अछि।
उत्तर मैथिली (देवनागरी लिपि)मे लिखब अनिवार्य अछि।
जतय निर्दिष्ट हो, शब्द-सीमाक अनुपालन अपेक्षित अछि।
उत्तरित प्रश्नक गणना क्रमानुसार कयल जायत। यदि काटल नहि गेल हो तँ अंशतः लिखित جج गणना सेहो कयल जायत।
प्रश्न -सह-उत्तर पुस्तिकाक कोनो रिक्त पृष्ठ अथवा कोनो و रिक्त ளாக अवश्य काटि दी।
MAITHILI
PAPER-II
( LITERATURE )
Time Allowed : Three Hours Maximum Marks : 250
QUESTION PAPER SPECIFIC INSTRUCTIONS
(Please read each of the following instructions carefully before attempting questions)
There are EIGHT questions divided in two Sections.
Candidate has to attempt FIVE questions in all.
Question Nos. 1 and 5 are compulsory and out of the remaining, THREE are to be
attempted choosing at least ONE question from each Section.
The number of marks carried by a question/part is indicated against it.
Answers must be written in MAITHILI (Devanagari script).
Word limit in questions, wherever specified, should be adhered to.
Attempts of questions shall be counted in sequential order. Unless struck off, attempt of a
question shall be counted even if attempted partly. Any page or portion of the page left
blank in the Question-cum-Answer Booklet must be clearly struck off.
KVMS-D-MTLI/29 1 124୦;
SECTION—A
1. प्रत्येक प्रश्न अनिवार्य अछि। काव्य-वैशिष्ट्यकँ निर्दिष्ट करैत निम्नलिखित अवतरणक ஊண் व्याख्या करू, जाहिमे भाव
स्पष्ट रहए (उत्तर अधिकतम 150 शब्दमे दातव्य) : 1025-50
(८) मानिनी, તુઝ असह्य होइछ व्यापार,
उचित ন आहत विजितहिं करब ୮୮ |
તુઝ अघातहिँ मूर्च्छित अछि मम प्राण
अधर-अमिअ-रस-दानहिं राखिअ एहि।
(b) आनन चुम्बि पयोधर धएल।
wag सखि मिलि मङ्गल காள
भन मनबोध हम अपन गेआन।
कहलन्हि बाल गोपालक ਬੇਤਗਰ॥
(೦ हमर वीणाध्वनि कने पहुँचैत ತೆ
सटल-पाँजर बोनिहारक कानमे।
सफल होइत तखन ई स्वर-साधना,
चिर-उपेक्षित जनक गौरव-गानमे।
(व) कांचन-कमल पवन उलटाओल ऐसन वदन संचारि।
सरबस लय पलटलि पुन बीन्धल ୪୮୮୮ बंक निहारि॥
हरि-हरि। के देअ என बाधा।
جج साध आध नहि पूरल, पलटि न ன राधा॥
(૭) हा रघुनाथ अनाथ जकाँ, दशकण्ठ-पुरी हम आइलि ۱
सिंहक त्रास महावनमे हरिणीक समान ஊண் ۱
चन्द्र-चकोरि অনন্য सदा, हम शोक-समुद्र समाइलि छी।
देवर-दोष कहू हम की, अपना अपराध கண் ۱
2. निम्नलिखित सभ प्रश्नक उत्तर लिख :
(2) “कृष्णजन्म एहन कृति सिद्ध भेल जे तत्कालीन साहित्य -जगतमे प्रचलित शृंगार -प्रधान संस्कृतनिष्ठ गीतधाराक
विपरीत ठेठ भाषा-शैलीक आश्रय ग्रहण காள --सयुक्ति विश्लेषण करू। 20
(৮) মিথিলা भाषा रामायण' महाकाव्य-जगतमे ज्ञान, कर्म ओ எக त्रिवेणीक संगम धिक ।' सुन्दरकाण्डक आधार
पर પિત करू। 15
(© “आधुनिक कविता નવ-નવ भाव-बोधसँ सम्पृक्त एवं नव अभिव्यक्तिक सामर्थ्यस॑ परिप्लावित परिलक्षित होइत
சகட "समकालीन मैथिली कविता 'क आधार पर सयुक्ति विवेचन امج ந்த
KVMS-D-MTLI/29 2
3. निम्नलिखित सभ प्रश्नक उत्तर लिखू :
(a) “महाकवि गोविन्द दास अपन कवितामे राधा-कृष्णक प्रेमलीला সা विरह-वर्णनक अद्भुत छटा छिटकौने छथि'
_ 5۶و विश्लेषण करू। 20
മു ணி महाकाव्यमे देश-प्रेम आ राष्ट्रीय अखंडता તથા मानवीय संवेदनाक व्यापक दिग्दर्शन भेल अलि।'*
पाठ्यांशक आधार पर सयुक्ति प्रमाणित करू। 15
(જ वैद्यनाथ मिश्र 'ગાત્રી' मानव जीवन, जगत ઝો देशक महाकवि ண --विस्तृत विश्लेषण करू। 15
4. निम्नलिखित सभ प्रश्नक उत्तर लिखू :
(a) विद्यापति गीतशती' मे भावक कोमलता, पद-लालित्य, तुक-कौशल, स्वर-माधुर्य एवं बिम्बक चमत्कार उत्पन्न
भेल अछि।” पाठ्यांशक आधार पर प्रमाणित करू। 20
(b) संस्कृत साहित्यशासत्रहुक अनुसार महाकाव्यक अधिकांश लक्षण 'कीचक-वध' मे भेटि जाइत अछि।”” प्रमाणित
ತಾ| 15
(જ “लालदासक 'रमेश्वचचरित मिथिला रामायण' मे रागरागिणी, लोकोक्ति, छन्दक विविधताक विन्यासक संग वर्णनन
सरलता अछि।'' पठित अंशक आधार पर विवेचन करू। 15
SECTION—B
5. निम्नलिखित अवतरणक सप्रसंग व्याख्या करू, আনিম भाव स्पष्ट रहए (उत्तर अधिकतम 150 शब्दमे दातव्य) :
10x5=50
(a) एक अपूर्व विश्वकर्मज निर्म्मउलियाक جج शोभा خ3 પરે जलप्रवेश காள आँखिक शोभा देषि हरिण वण
गेल। केशक शोभा 38 चमरी पलायन कएल। ہہ शोभा देखि तालियेँ हृदय वीदीर्ण्ण कएल। अधरक शोभा देषि
प्रवाल द्विपान्तर गेल। काँनक शोभा देखि बौद्ध ध्यान स्थित भेल। कण्ठक शोभा देषि وج समद्रप्रवेश कएल।
जखन हम भारी-भारी धोधिबला கணக் प्रसादक पातिल दूनू हाँ उठा कऽ अधपौआ शालग्राम पर चढ़बैत देखैत رم
छिऐन्ह वा गुलाबजामुन सन नर्मदेश्वर कै पहिराबक हेतु पुरोहित कै अपना ளின் नापि कय ತಾತ गेठियबैत देखइ
छिऐन्ह, तँ हुनका सभक बुद्धि पर दया আনি जाइत ۱
(८ जेठ छोटक વાત अखनी जाय दे। पिरित जइसन પર્વે भौजी नहि बनायब ন’ की अप्पन माय बनायब? सुन चनरा
जखनि چم कोनो விகிச் सगाइ करब ત' तहूं ओकरा भौजी बना ۱
(0 लोक जे किछु सोचैए से অঁ होब' लगै तँ ककरो मोनमे असन्तोष रहबै ने करतै, मुदा जे करबाक ओकरामे क्षमता रहै
छै तकर तँ अवसर नै देल जाइ तँ ओ आगि जकाँ धधकि उठैए-धधकैत रहैए!
(૭ दुख कि दुःख सन भेल? अहो सप्पत खाक कहै છી जे हम स्टेशन पर पड़ल की सभ सोचै छलहूँ। होइ छल जे
एही तौनीकें फाड़िक ع कौपीन बना লী, आ चल জাই... कतहूँ जाक बाबाजी भ जाइ। ...एहन ۸۳ कोन
माया-ममता?
KVMS-D-MTLI/29 3 | ௨.௦
6.
7.
8.
निम्नलिखित सभ प्रश्नक उत्तर लिखू :
(2) 'वर्णरत्नाकर'ं मैथिलीक आदि गद्य-ग्र्थ धिक जाहिमे मध्यकालीन मिथिलाक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं
साहित्यिक उत्कर्ष द्युतिमान भेल अछि।'' पठित अंशक आधार पर प्रमाणित करू।
“मणिपद्य गाथा-रत्नकें औपन्यासिक स्वरूप प्रदान करबामे अपूर्व कला-कौशल एवं साहित्य-साधनाक परिचय देने رم
छथि'' --लोरिक विजय'क आधार पर पल्लवित करू।
(2) “GR ककाक तरंग'क मुख्य पात्र खट्टर कका मनुष्य एवं पदार्थक विलक्षण व्याख्या प्रस्तुत करैत अछि।'' वर्णन
करू।
निम्नलिखित सभ प्रश्नक उत्तर लिखू :
(a) कृति राजकमल'क तात्त्विक विवेचनक संग-संग भाषा-शिल्पक महत्त्व पर प्रकाश दिअ।
മു “ண்ட आधुनिक समाज ओ संस्कृतिक सफल प्रतिनिधित्व करैत afer’ सयुक्ति प्रतिपादन करू।
(જ ணன चाहक जिनगी' મે नाटककार मानव-जीवनक समस्या, संघर्ष ओ परिस्थिति-परिवेशक यथार्थ चित्रण
कएलनि अछि। समीक्षा करू।
निम्नलिखित सभ प्रश्नक उत्तर लिखू :
(6) “ఇలా मैथिलीमे एक उत्कृष्ट आँचलिक उपन्यास थिक'* --संयुक्ति विवेचन करू।
“कृति ٭ “राजकमलक கம் मिथिलाक आदर्श नारीक चरित्र एवं सांस्कृतिक वैभव उद्घाटित भेल رم
राजकमल'क आधार पर पल्लवित करू।
(જ “मणिपद्य विरचित 'लोरिक विजय' लोकगाथाधृत ऐतिहासिक उपन्यास थिक।' प्रमाणित करू।
20
15
15
20
15
15
20
15
15
KVMS-D-MTLI/29 4 SB27—42